दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ
गाया था जो कभी मीरा ने
प्रीत-रस में घुला
वही राग मैं गाऊँ
निहार रघुवर को जनक वाटिका में
उठा था जो उल्लास
जनक नंदनी के मन में
उस उल्लास को मैं
गीत में मिलाऊँ .......
दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ
लागे ऐसा कि बरसने को आज
मेघ आए हैं मोरे अंगना
हर बूंद में सुधा है
इस बारिश में मैं आज भीग जाऊँ ......
दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ
प्रीत की रीत से रही मैं
सदा ही अजान
ये भाव भला क्या हैं
कैसे मैं जान पाऊँ ......!
किस-किसको बताऊँ
किससे छुपाऊँ .........!
ये मन मोरा कैसा छलिया है
कभी कहे मैं सबसे बताऊँ
कभी कहे इससे सबसे छुपाऊँ
दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ ......
अंजलि पंडित ।
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ
गाया था जो कभी मीरा ने
प्रीत-रस में घुला
वही राग मैं गाऊँ
निहार रघुवर को जनक वाटिका में
उठा था जो उल्लास
जनक नंदनी के मन में
उस उल्लास को मैं
गीत में मिलाऊँ .......
दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ
लागे ऐसा कि बरसने को आज
मेघ आए हैं मोरे अंगना
हर बूंद में सुधा है
इस बारिश में मैं आज भीग जाऊँ ......
दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ
प्रीत की रीत से रही मैं
सदा ही अजान
ये भाव भला क्या हैं
कैसे मैं जान पाऊँ ......!
किस-किसको बताऊँ
किससे छुपाऊँ .........!
ये मन मोरा कैसा छलिया है
कभी कहे मैं सबसे बताऊँ
कभी कहे इससे सबसे छुपाऊँ
दिल कह रहा है कि
आज मैं कुछ गुन-गुनाऊँ ......
अंजलि पंडित ।