शातिर होने का हम पे ये जमाने वाले
इल्जाम लगाते हैं....
हम कितने मासूम हैं ये इनको
पता ही नहीं है
कहतें हैं कि हम माहिर हैं
दिले हुकमत की कला में
पर कैसे आ जाते हैं लोग हमारी रजा में ...
ये हमे पता नहीं है
हम तो निकले थे घर से
खुदा-ए - इबादत के लिए
ये कमबख्त कदम कैसे
आ पहुंचे महफिल में
ये हमे पता नहीं नहीं है....
इल्जाम लगाते हैं....
हम कितने मासूम हैं ये इनको
पता ही नहीं है
कहतें हैं कि हम माहिर हैं
दिले हुकमत की कला में
पर कैसे आ जाते हैं लोग हमारी रजा में ...
ये हमे पता नहीं है
हम तो निकले थे घर से
खुदा-ए - इबादत के लिए
ये कमबख्त कदम कैसे
आ पहुंचे महफिल में
ये हमे पता नहीं नहीं है....
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