Friday, 7 December 2012

शातिर होने का हम पे ये जमाने वाले

इल्जाम लगाते हैं....

हम कितने मासूम हैं ये इनको

पता ही नहीं है

कहतें हैं कि हम माहिर हैं

दिले  हुकमत की कला में

पर कैसे आ जाते हैं लोग हमारी रजा में ...

ये हमे पता नहीं है

हम तो निकले थे घर से

खुदा-ए - इबादत के लिए

ये कमबख्त कदम कैसे

आ पहुंचे महफिल में

ये हमे पता नहीं नहीं है....

No comments:

Post a Comment