Friday, 7 December 2012

जख्मे - दर्द सुनाते तो सभी हैं

पर छुपाने का मजा कुछ और है

गमों की सदा से आंसुओं की -

लहर उठती है,

पर सीने में सागर दबाने का

मजा और है....

जख्मों से मजबूर होकर रो लिए

तो क्या....

हर दर्द में मुस्कुराने का मजा

और है...... 

1 comment:

  1. so nice...mushkurane ka maza to sirf dard me haiiii

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